मेरा यह लेख १२ नवम्बर, १९९२ के नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ था. इसमें लिखी कुछ बातें शायद आज के माहौल में विसंगत लगें, लेकिन यह तीन दशक अधिक से पहले लिखा गया था और इसलिए इसे उसी परिप्रेक्ष्य में पढ़ा जाना चाहिए. अपने पुराने लेखों को अपने ब्लॉग पर संजो कर रखने की मेरी कोशिश की अगली कड़ी है यह पोस्ट:
महिलाओं की एक अंग्रेज़ी पत्रिका के सितम्बर अंक में टीनएज (१३ से १९ वर्ष की उम्रवाली) लड़कियों को एक अनमोल सलाह दी गई है. एक पन्ने के इस लेख में बताया गया है कि किस तरह लड़कियाँ अपने बॉयफ्रेंड को किसी दूसरी लड़की की ओर आकर्षित होने से रोक सकती हैं. इससे पहले कि इस लेख पर कोई टिप्पणी की जाए, ज़रा पढ़ लीजिए कि यह लेख आख़िर कहता क्या है--
"लड़कियों, लड़के आख़िर लड़के ही हैं. आपका बॉयफ्रेंड भी अपने यार-दोस्तों के साथ कुछ समय बिताना चाहेगा. उसे इतनी आज़ादी दीजिए कि वह रात में अपने दोस्तों के साथ घूमने जा सके, वीडियो गेम खेल सके या चाहे तो 'ब्लू फिल्म' भी देख सके. उसे कुछ समय अपनी तरह से बिताने दीजिए. आख़िर आप भी तो चाहेंगी कि आप कुछ समय अपनी सखियों के साथ गुज़ारें और ऐसे काम करें जो लड़कियाँ आम तौर पर करती हैं, जैसे अपने लिए कपड़े या जूते खरीदना. लड़के तो शॉपिंग से नफ़रत करते हैं, इसलिए आप यह काम अपनी सखियों के साथ कर लें.
"जब आप अपने बॉयफ्रेंड के साथ बाहर जाती हैं तो ग़ौर कीजिए कि आपकी कौनसी बात उसे अच्छी लगती है, आपके कौनसे कपडे, आपकी लिपस्टिक का कौनसा शेड उसे पसंद है. उसके साथ बाहर जाते वक़्त उसीकी पसंद के अनुरूप श्रृंगार कीजिए. कुछ लड़के तो आपके लिपग्लॉस का स्वाद या गंध भी पसंद करेंगे. यदि आपके बॉयफ्रेंड को जींस पसंद हैं और वह चाहता है कि आप जींस पहनें, वह आपको तुरंत बता देगा. यदि आपकी स्कर्ट का लंबापन या छोटापन उसे अखरता है तो वह ज़रूर आपसे कहेगा.
"अपने बॉयफ्रेंड के साथ जब आप किसी पार्टी में जाएँ तो जोंक की तरह उससे चिपटी न रहें. इससे आप 'पज़ेसिव' कहलाई जाएँगी. उसे अपनी पसंद की अन्य लड़कियों के साथ 'डांस' करने दें और आप भी अन्य लड़कों के साथ नाचें. बस, पार्टी का आख़िरी डांस यदि वह आपके साथ करे तो वही काफ़ी है.
"आपका बॉयफ्रेंड तयशुदा वक़्त पर न आए या आने में उसे कुछ देर हो जाए तो तनिक भी नाराज़ न होइए. आख़िर वह भी एक इंसान है और इंसान गलतियाँ करता है. हो सकता है कि वह आपके पास आने के लिए तैयार हो रहा था कि उसी वक़्त उसकी जींस या पैंट का ज़िपर टूट गया और उसे दूसरे कपड़ों को इस्त्री करनी पड़ गई, जिसकी वजह से उसे आने में देरी हो गई. वह यह सब आपसे नहीं कहेगा, क्योंकि इसे वह अपनी मर्दाना शान के ख़िलाफ़ मानता है.
"अपने बॉयफ्रेंड को उसकी सिगरेट पीने की आदत को लेकर परेशान न करें. यदि ऐसा करेंगी तो वह आपको छोड़कर किसी और से दोस्ती कर लेगा. जब आपका जन्मदिन आनेवाला हो तो धीरे से उससे कहिए, 'मेरे जन्मदिन का सबसे बढ़िया तोहफ़ा यही होगा कि मैं जिसे चाहती हूँ, वह सिगरेट पीना छोड़ दे.' अपने बॉयफ्रेंड की दाढ़ी या लम्बे बालों के बारे में भी यही नुस्ख़ा आज़मा सकती हैं. "
ऊपर-ऊपर से आधुनिक लगनेवाला यह लेख क्या लड़कियों को दक़ियानूसी बातें सिखाता-सा नहीं लगता?आख़िर वह यही तो कह रहा है कि अपने बॉयफ्रेंड के हर तरह के व्यवहार को सहें, संयम रखें. उससे कुछ कहना भी हो तो इस तरह से कहें कि वह नाराज़ न हो जाए. हाँ, उसकी पसंद का ख़्याल ज़रूर रखें और उसीकी पसंद के अनुरूप कपडे पहनें. यदि ऐसा न करेंगी तो वह आपको छोड़कर किसी और से दोस्ती कर लेगा. क्या यह सलाह उसी सीख की तर्ज़ पर नहीं है जो हमारे यहाँ लड़कियों को आम तौर पर बचपन से ही दी जाती है--जैसे शादी के बाद पति की हर इच्छा पूरी करो, वह चाहे कुछ भी कर ले, उफ़ तक न करो, उसीकी पसंद से पहनो-ओढ़ो, उसीकी पसंद का खाना पकाओ, उसकी कुछ बातें चाहें अच्छी न लगें, उन्हें नजरअंदाज कर जाओ, पतिव्रता बनी रहो--एक आदर्श पत्नी का यही धर्म है.
और मज़े की बात तो यह है कि अपने आपको आधुनिक बतानेवाली, बम्बई जैसे महानगर से अँग्रेज़ी में प्रकाशित होनेवाली, उच्च और उच्च मध्यवर्गीय शिक्षित परिवारों में पढ़ी जानेवाली एक पत्रिका इस तरह की सामग्री परोस रही है.
जहाँ यह पत्रिका यह मानकर चल रही है कि किशोरियों का बॉयफ्रेंड तो होना ही चाहिए, वहीं वह किशोरियों के मन में असुरक्षा की यह भावना भी पैदा कर रही है कि बॉयफ्रेंड को संभाल कर रखो वर्ना वह तुम्हें छोड़कर किसी और का हो जाएगा.
यदि लड़कियों को पश्चिमी आधुनिकता से ही वाक़िफ़ कराना है तो उन्हें बताइए कि पश्चिमी लड़की का रवैया क्या होता है. पश्चिमी लड़की अपने निजत्व पर अपने बॉयफ्रेंड की पसंद को इतना हावी कभी भी नहीं होने देगी कि बस, बॉयफ्रेंड की रुचि के अनुसार ही सजे-धजे. इससे पहले कि उसका बॉयफ्रेंड उसे छोड़कर किसी और से दोस्ती कर ले, वह खुद ही बॉयफ्रेंड को छोड़ देगी. जहाँ पति-पत्नी का एक-दूसरे से सम्बन्ध-विच्छेद आम है, वहाँ बॉयफ्रेंड को छोड़ना कौनसी बड़ी बात है? ऐसा नहीं है कि रिश्तों की टूटन से उन्हें दुःख नहीं होता, लेकिन वहाँ इस तरह की बातों को ज़िंदगी का एक हिस्सा मानकर स्वीकार कर लिया गया है.
लड़कियों को दब -झुक कर चलने की दक़ियानूसी सीख को आधुनिकता का चमचमाता मुलम्मा चढ़ाकर पेश करने की बजाय क्या यह अच्छा नहीं होगा कि लड़कियों को घर-परिवार और समाज में अपने अधिकारों के प्रति सजग किया जाए और बॉयफ्रेंड की चिंता छोड़ अपने लिए एक सच्चा मित्र तलाश करने की प्रेरणा दी जाए जो हो सकता है आगे जाकर जीवनसाथी बन जाए?